History – वैदिक सभ्यता 1

आज हम बात करते है , वैदिक सभ्यता की । वैदिक सभ्यता के बारे में सार्वभौम मान्यता के आधार पर इसे दो भागों में बाँटा जाता है ,
ऋग्वैदिक काल या पूर्व वैदिक काल (1500 – 1000 ई. पू.)और उत्तर वैदिक काल (1000 – 600 ई. पू.)।इस प्रकार वैदिक काल को 1500 ई . पू. से 500 ई . पू.  का मान लेते है ।     

 वेदों का ज्ञान ऱखने वाले , उसे पढ़ने वाले, और वेदों के ही अनुसार जीवन यापन करने वाले लोगो को “आर्य” कहते थे ।
ये उस काल के लोगो का जातिगत नाम था । आर्य का शाब्दिक अर्थ होता है , श्रेष्ठ ।
जो व्यक्ति सुसंस्कृत और सभ्य हो उसे आर्य कहते है ।     

वैसे विभिन्न विद्वानों का वेदों के उतपत्ति काल के विषय मे विभिन्न मत है । महृषि दयानंद सरस्वती
जिन्होंने आर्य समाज की स्थापना की और भारत की स्वतंत्रता के लिए अंग्रेज़ो से निर्णायक युद्ध
की भूमिका तैयार कर दी , उनके अनुसार वेदों को आये हुए सन 2020 में वेदों को आये हुए 196853120
वर्ष हो चुके है और 25 मार्च 2020 से 196853121 वाँ वर्ष प्रारंभ हो चुका है ।
और यही मत सटीक प्रमाणित होता है ।       

आर्य जन मूलतः

भारत के ही निवासी थे, तिब्बत से हिमालय की तराई के पास उनकी उतपत्ति मानी जाती है ।
फिर यहां से सम्पूर्ण आर्यावर्त जो हमारे देश भारत का पुराना नाम था , वहां से पूरे विश्व में फैल गए ।     

वेदों की रचना जिस भाषा मे हुई उसे संस्कृत या पूर्वकालीन इंडो आर्यन भाषा कहते है । आर्यो का मुख्य स्थान मूलतः भारत और ईरान था। 
आर्य मुख्यतः शाकाहारी थे, पर कुछ जगह के प्रमाणों से यह भी ज्ञात होता है कि इनके भोजन में
मांसाहार का भी प्रयोग होता था , पर यह अधिक प्रामाणिक नही है ।
आर्य दूध एवं दूध से बनी वस्तुयें अधिक पसंद करते थे । आर्यो का संगीत और गायन ,
नृत्यादि में पूर्ण रुचि थी ।

आर्य पहनावे में पुरुष अधोवस्त्र जिसे धोती भी कहते है  और ऊपर उत्तरीय एक अंगरखा पहनते थे ।
एवं महिलाओ में साड़ी पहनने का चलन था ।  मैंने महृषि दयानन्द सरस्वती का वैदिक सभ्यता के उदय
का काल बताया जो सटीक और प्रामाणिक है , अब विभिन्न विद्वानों द्वारा इसका क्या काल क्रम
निर्धारण होता है , वह बताता हूँ ।       

बाल गंगाधर तिलक ने ज्योतिषीय गणना करके इसका काल 6000 ई . पू. माना था । हरमौन
जैकोबी ने जहाँ इसे 4500 ईसा पूर्व से 2500 ईसा पूर्व आँका था । वही एक सुप्रसिद्ध संस्कृत
विद्वान विन्टरनिट्ज ने इसे 3000 ई . पू. बताया। यहां मैं आपको ई.पू. का अर्थ विशेष रूप से
बता देना चाहता हूँ, इसका अर्थ  होता है , ईसा मसीह के जन्म से इतने वर्ष पूर्व। धार्मिक स्तिथि –
आर्य मुख्य रूप से वेदों को ईश्वर की वाणी मानकर उसके अनुसार उपासना करते थे । यज्ञ ईश्वर
की उपासना का मुख्य मार्ग था। वेद क्या है , एवम वैदिक दर्शन क्या है इसके लिए एक नवीन
पोस्ट पर लिख कर बताऊंगा ।

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