History – वैदिक सभ्यता 2

वैदिक सभ्यता – १ में आप लोगो ने आर्य कौन है , एवं आर्यो के जीवन शैली का साधारण परिचय
प्रा प्त कर लिया होगा । अब इस पोस्ट में मैं आपको ये बताऊंगा कि वेद क्या है , एवं वैदिक
दर्शन क्या है ।जैसा कि आप लोगो ने पिछली पोस्ट में पढ़ा कि आर्य वेदों को ईश्वर की वाणी
मान कर उसके अनुसार आचरण करते थे ।

वैसे ये केवल आर्यो की मान्यता नही अगर आप वेदों का एवं आर्ष ग्रंथो का अध्ययन करेंगे तो
आपको अनुभव होगा कि परम पिता परमेश्वर ने सम्पूर्ण मानव जाति की भलाई के लिए वेदों
को इस पृथ्वी पर ऋषियो के द्वारा अवतरित किया है । धन्य है वे पुण्यात्मा ऋषि जिनकी वजह
से हमे वेद का ज्ञान प्राप्त हुआ । अभी शायद ये बाते आपको समझ न आये मैं आपको पहले
कुछ शब्दों की परिभाषा स्पष्ट कर देता हूँ , जिससे हमें वैदिक सभ्यता को समझने में सहायता मिलेगी ।

वेद

वेद वे ग्रंथ है , जो कि इस सृष्टि के आरंभ में परम पिता परमात्मा ने कुछ पुण्यात्मा ऋषियो को उनके
ध्यान की अवस्था मे प्रदान किया था , जो उन्होंने अपने अंतर्ध्वनि से सुना था । सीधे परमात्मा से
सुनने के कारण वेद को श्रुति भी कहते है ।
वेदों के बारे में अनेक लोगो का ये प्रश्न होता है कि हम कैसे माने कि वेद ही ईश्वर
की वाणी है, तो उसके उत्तर में मैं ये कहना चाहूँगा कि –

१.  वेद के मुकाबले में जिन ग्रंथो को ईश्वर की वाणी होने का दावा किया जाता है , वो ग्रंथ उन
लोगो की स्थानीय भाषा मे है, जो उन लोगो के लिए पढ़ना सरल है , परन्तु बाकी स्थानों के लोगो
के लिये नही अगर वे ग्रंथ ईश्वर की वाणी होते तो सभी उस भाषा मे होते जो सभी मनुष्यो के
लिए समान परिश्रम करके सीखने वाली होती । उसी स्थान पर अगर हम वेदों की भाषा का अध्ययन
करे तो यह वैदिक संस्कृत में लिखी गयी है ,
जो सभी मनुष्यो के लिए समान परिश्रम करके सीखने योग्य है ।

२. बाकी सभी ग्रंथ जो ईश्वर की ओर से होने का दावा करते है ,
वो पूरे एक साथ नही लिखे गए धीरे धीरे कभी एक अध्याय अभी  तो कभी दूसरा बाद में
परन्तु वेद पूरे के पूरे एक साथ ही ऋषियो को प्राप्त हो गए थे , क्योंकि ईश्वरीय ज्ञान कभी
अधूरा नही होता और ईश्वर सभी मनुष्यो की भलाई के लिए एक बार मे ही पूरा ज्ञान दे
देगा वह दयालु है , वह बाद का इंतज़ार क्यों करेगा।

आर्ष ग्रंथ

वेद एवं वेद को आधार मानकर लिखे गए शास्त्र आर्ष ग्रंथ कहलाते है ।   

संहिता

ये ही मूलतः  चार वेद है , जिनके आधार पर शस्त्रादि आर्ष ग्रंथ लिखे गए है । ये चार है – 
१. ऋग्वेद – ये पद्य रूप में प्रार्थनाओं का वेद है । इसमें दस मण्डल एवं 10552 मन्त्र हैं ।
२. यजुर्वेद – ये यज्ञ का वेद है । एवं इसमे गद्य के रूप में मन्त्र है ।
3988 मन्त्र है । 
३. सामवेद – इस वेद के मंत्रों का गान किया जाता है । इसमें 1975  मन्त्र है ,
जिसमे शेष 75  को छोड़कर बाकी सभी ऋग्वेद से लिये गए है ।
४. अथर्ववेद – इसमे विज्ञान के मन्त्र एवं ज्ञान है । इसमे 6000 मन्त्र है ।

वेदांग

6 वेदांग हुए है , जिन्हें वेद का ही अंग माना जाता है  ,
वेद के अध्ययन में उनका अध्ययन किया जाता है । वे इस प्रकार है –
१. शिक्षा 
२ . कल्प
३. व्याकरण
४. निरुक्त
५. छंद
६. ज्योतिष

शास्त्र

वेद के आधार पर छः प्रकार के दर्शन हुए वे सभी दर्शन ग्रंथ एवं दर्शन शास्त्र कहलाते है ।
वे इस प्रकार है –
१ . न्याय शास्त्र – इसका प्रकाश करने वाले ऋषि का नाम “महृषि गौतम “
२. वैशेषिक शास्त्र – “महर्षि कणाद”
३. सांख्य शास्त्र – “महर्षि कपिल “
४. योग शास्त्र – “महर्षि पतंजलि “
५. मीमांसा
६.  वेदांत 

उपनिषद

उपनिषद का अर्थ होता है  , गुरु के समीप बैठकर ज्ञान अर्जित करना । वेदों के ज्ञान को ऋषियो
ने समझकर अपने शिष्यो को समझाया उन उपदेशो के संकलन को उपनिषद कहते है ।
उपनिषदों की संख्या १०८ या 108 बताई जाती है , जिनमे से अभी केवल 12 ही उपलब्ध है ।
अन्य सभी समय के गर्त में विलुप्त हो गए है , पर मेरी निजी मान्यता ये है कि ईश्वरीय ज्ञान
नष्ट नही हो सकता वे 108 का संपूर्ण ज्ञान इन 12 के नियमपूर्वक अध्ययन से प्राप्त
किया जा सकता है ।

अरण्यक – अरण्य का अर्थ होता हैं , वन अर्थात जंगल । ऋषियो ने वनों में रहकर वेदानुसार 
एकांत साधना करके जो ज्ञान अर्जित किया उसे अरण्यक कहते है । 
इतिहास – इन सबके अतिरिक्त दो इतिहास ग्रंथ भी उपलब्ध होते है , जिनसे हमारे आर्यावर्त
अर्थात भारत के गौरवमयी इतिहास का ज्ञान होता है । वे दो ग्रंथ है 

१ . रामायण – इस ग्रंथ को लिखने वाले महर्षि वाल्मीकि थे । इस ग्रंथ को आज से लगभग
9 लाख साल पहले लिखा गया था । इसमे मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के जीवन 
चरित्र का वर्णन है । जिन्होंने मनुष्यता की गरिमा को एक उच्च स्तर पर पहुँचा दिया ।
इसमें कुल 24000 श्लोक है । इसलिए इसे चतुर्विशति संहिता भी कहते है ।

२. महाभारत – इस ग्रंथ को लिखने वाले महर्षि वेद व्यास थे । जिन्हें कृष्ण द्वैपायन भी कहते है ।
इस ग्रंथ को आज से लगभग ५००० या 5000 साल पहले लिखा गया था । इसमे प्राचीन
भारत की राजनैतिक स्तिथियों का वर्णन है एवं कौरव तथा पांडव के युद्ध का वर्णन है जिसमे
हमारे भारत के ज्ञान विज्ञान को बहुत क्षति पहूँची थी । तथा वह ग्रंथ जो आज विदेशो में भी
शोध का विषय बना हुआ है , “भगवद गीता ” इसी महान ग्रंथ का हिस्सा है  । महाभारत में
कुल लगभग 1 लाख श्लोक है । इसलिए इसे शतसहस्त्री संहिता भी कहते है ।
समस्त आर्य एक ईश्वर पर विश्वास रखते हुए वेदों के अनुसार जीवन यापन करते थे ।

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