जबलपुर – एक रमणीय स्थल

आज बात करते है,मेरी जन्मभूमि की अर्थात जबलपुर की ।

स्तिथि – जबलपुर भारत देश के मध्यप्रदेश नामक राज्य का एक नगर है । जिसकी मध्यप्रदेश के मेट्रो कहे जाने वाले नगर इंदौर और राजधानी भोपाल से बराबरी की तुलना की जा रही है । एवं यह भी एक गौरवपूर्ण विषय है , कि जबलपुर की विकास दर को देखते हुए अनेको बुद्धिजीवियों द्वारा इसे मध्यप्रदेश की उपराजधानी बनाने की मांग भी करी जा रही है ।

नाम – इस नगर का नाम जबलपुर पड़ा है , एक विद्वान तपस्वी महर्षि जबालि के नाम पर । पहले इस नगर का नाम जाबालिपुरम था । तथा फिर काल के परिवर्तन के प्रभाव स्वरूप इसको जबलपुर कहा जाने लगा ।

महर्षि जबालि

महर्षि जबालि एक वाम मार्गी , चार्वाक के समान मान्यताओ वाले ऋषी के रूप में विख्यात है । इनका काल लगभग त्रेता युग के आस पास का माना जाता है । ऐसे भी प्रमाण मिलते हैं ,की स्वयं मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम महर्षि का बहुत सम्मान करते थे । महर्षि ने जबलपुर में माँ नर्मदा नदी के तट पर घोर तपस्या की थी ।

तीर्थ

माँ नर्मदा के तट पर बसे होने के कारण जबलपुर को तीर्थ का दर्जा प्राप्त है । नर्मदा नदी कल कल करती हुई जबलपुर के मध्य से प्रवाहित होती है । तथा माँ नर्मदा के अनेकों घाट है जबलपुर में , जिसमे से ग्वारीघाट , जिलहरीघाट , सबसे प्रसिद्ध भेड़ाघाट मुख्य है । माँ नर्मदा के ही तट पर गीता धाम नामक बहुत ही पवित्र स्थान है , जहाँ नर्मदा कुम्भ के समय साधु संतों का समागम दर्शनार्थियो को कृतकृत्य कर देता है । गीताधाम में अक्सर भागवत और राम कथा एवम यज्ञ आदि , धार्मिक कृत्य होते रहते है ।

दर्शनीय धर्म स्थल

1. कचनार सिटी – जबलपुर का धार्मिक रूप से बहुत अधिक महत्व है , यहां पर कचनार सिटी में भगवान शंकर की लगभग 72 फुट की प्रतिमा है । तथा उसी प्रतिमा के नीचे एक गुफा बनाई गई है , जिसमे प्रवेश करके आप बारह ज्योतिर्लिंगों की प्रतिकृति के दर्शन करके खुद को एक अद्भुत आध्यात्मिक वातावरण से जुड़ा अनुभव करेंगे । शिवरात्रि और सावन में यहां की शोभा देखने लायक होती है ।

2. गुप्तेश्वर – गुप्तेश्वर एक शिवलिंग का नाम है ,और उसी शिवलिंग के नाम पर उस स्थान का नाम गुप्तेश्वर पड़ गया । वह शिवलिंग एक गुफा के अंदर स्तिथ है , जो कि स्वयंभू है अर्थात अपने आप ही धरती से प्रकट हुआ है, मानव निर्मित नही है । सावन और शिवरात्रि आदि अवसर पर उसका पूजन , अर्चन एवं दर्शन करने लोग दूर दूर से आते है । महादेव के दर्शन के लिए मीलो लंबी कतार लगती है , लोग घंटो खड़े रहते है , पर फिर भी किसी के चेहरे पर थकान नही दिखती बल्कि मुस्कान दिखती है । और होठो पर “बोल बम ” और “हर हर महादेव ” की ध्वनि गुंजायमान रहती हैं ।

एतिहासिक महत्व

ऐसा माना जाता है ,गोंड महारानी दुर्गावती ने युद्ध के समय एक बार उस गुफा में छुपी थी । और महादेव से विजय की प्रार्थना की थी ।
मन्दिर से एक तरफ सीढिया है , जिससे ऊपर जाने पर हम घोड़े के पैरों की टॉप देख सकते हैं । जो महारानी दुर्गावती के घोड़े के पैरों की है ।
इस प्रकार हम कह सकते है , कि जबलपुर एक शिव नगरी हैं ।

3. त्रिपुर सुन्दरी मन्दिर – यह मंदिर जबलपुर के तेवर में स्तिथ है । यह शहर से 14 किलोमीटर दूर भेड़ाघाट मार्ग पर”हथियागढ़” नाम के स्थान में स्थित है। मन्दिर के अन्दर माता महाकाली, माता महालक्ष्मी और माता सरस्वती की विशाल मुर्ति स्थापित है।
11वीं शताब्दी में बने इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यहां जो मूर्ति है वह धरती के अंदर से प्रकट
हुई थी ।

4. भेड़ाघाट

भेड़ाघाट में माँ नर्मदा द्वारा निर्मित एक प्राकृतिक जल प्रपात अर्थात झरना है । बन्दर कूदनी आदि प्रमुख स्थल यही पर है ।
फ़िल्म और टेलीविज़न में भेडाघाट –
1. इस स्थान की रमणीयता से बॉलीवुड और हमारी टेलेवीजन इंडस्ट्री भी प्रभावित हुए बिना न रह सकी । यहां पर रितिक रोशन स्टारर “मोहनजोडारो” की भी शूटिंग हुई है । फ़िल्म का जो पहला सीन है , वह इसी स्थल का है , जिसमे रितिक मगरमच्छ को मारते है ।

2. ऐसी खबर है , कि स्टार प्लस में 2013 में नई वाली महाभारत आई थी , उसके भी कुछ सीन विशेष रूप से पहले एपिसोड का पहला सीन यही पर शूट हुआ था ।

अन्य दर्शनीय स्थल –

1. विश्वविद्यालय – जबलपुर में रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय है । इसमें तथा इसके अंतर्गत महाविद्यालयों ने विभिन्न प्रकार के स्नातक तथा स्नाकोत्तर कार्यक्रम चलते रहते है ।

2. संग्रहालय – रानी दुर्गावती संग्रहालय जबलपुर के ह्रदय जो कि बस स्टैण्ड के पास स्तिथ है । वह स्थान नेपियर टाउन के नाम से प्रसिद्ध है , जहाँ संग्रहालय स्तिथ है ।
संग्रहालय का आकर्षक भवन द्विमंजिला एवं संग्रहालय विज्ञान के निर्दिष्ट सिंद्धान्तों व आवशकता के अनुरूप है। संग्रहालय में भूतल पर चार दीर्घायें एवं एक कला वीथिका आडोटोरियम हाल है। प्रथम तल पर भी चार दीर्घायें है।

इन दीर्घाओं में शैव दीर्घा, वैष्णव दीर्घा, जैन दीर्घा, सूचकांक दीर्घा, उत्खनन अभिलेख दीर्घा, मुद्रा दीर्घा एवं आदिवासी कला दीर्घा है। (एक गलियारें में चौसठ योगिनियों के छायाचित्र प्रदर्शित है) इन दीर्घाओं में संग्रहालय के संग्रह की चयनित कलाकृतियों को प्रदर्शित किया गया है, शेष कलाकृतियां आरक्षित संग्रह के रूप में रखी गई हैं। आरक्षित संग्रह से पुनः चयनित कर अपेक्षाकृत कम महत्व की प्रस्तर कलाकृतियों को संग्रहालय प्रांगण के उद्यान में मुक्ताकाश प्रदर्शित किया गया है। संग्रहालय में कुल 6163 पुरावशेष संग्रहीत है।
जिस दीर्घा का जो नाम है , उसी से सम्बंधित वस्तुए एवम चैत्रादि उसमे है ।

सामरिक महत्व –

1. सामरिक दृष्टि से जबलपुर का महत्व बहुत अधिक है । क्योंकि मध्य प्रदेश संपूर्ण भारत के मध्य में है, और जबलपुर मध्यप्रदेश के मध्य में इसलिए यहां पर सेना के हथियारो का संग्रहण, उनका निर्माण आदि कार्य आसानी से किये जा सकते है , जिसकी हमारे शत्रु देशो को भनक तक न पड़े ।

2. आयुध निर्माणी (Gun Carriage Factory ) – जबलपुर में इस फैक्ट्री में सेना के लिए शस्त्रो का निर्माण होता है, जो हमारे देश की सुरक्षा में काम आते है ।

3. जबलपुर में अनेको रेजिमेंट है , जिनको देख कर हमारी सेना की अपार शक्ति का अंदाज़ा लगाया जा
सकता है ।

जबलपुर का गौरव –

शहीद अश्विन काछी , जो पुलवामा में देश की रक्षा करते हुए शहीद हो गए थे , इस जबलपुर की मिट्टी के
मात्र 20 वर्ष के लाल ने जबलपुर का नाम और सिर पूरे भारत मे गर्व से ऊंचा कर दिया ।

प्रशासनिक महत्व –

जबलपुर प्रशासनिक दृष्टि से भी मध्यप्रदेश के लिए महत्वपूर्ण स्थान रखता है । क्योंकि राज्य का उच्च न्यायालय (High Court) यहां पर ही स्तिथ है ।

घूमने फिरने की दृष्टि से भी जबलपुर अपना अलग स्थान रखता है ,ऐसे कई स्थल है , जहाँ आप अपने परिवार के साथ जाकर क़्वालिटी टाइम बिता सकते है , उनमे सदर चौपाटी, सिविक सेंटर चौपाटी , बिग बाजार मॉल , समदड़िया माल आदि सर्व प्रमुख है ।
बिग बाजार और समदड़िया में आप मूवीज़ आदि भी देख सकते है , ये दोनों ही स्थान मल्टीप्लेक्स है । वैसे जबलपुर में अन्य महत्वपूर्ण टॉकीज भी है , जैसे, शारदा, ज्योति आदि ।

यहां के पचपेढ़ी आदि स्थान तो किसी हिल स्टेशन से कम नही लगते , वह भी पहाड़ियों पर स्तिथ हैं ।
बहुत ही शीघ्र जबलपुर में आई टी पार्क बनाने की भी तैयारी जोरों शोरो पर शुरू होने की खबर भी है ,
जिससे जबलपुर के सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवाओ को काम की तलाश में अन्य मेट्रो सिटीज़ की ओर नही भागना पड़ेगा ।
तो हम देख सकते है ,कि जबलपुर एक विकासशील नगर के रूप में उभर के सामने आ रहा है , जो बहुत ही गौरव का विषय है ।

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