आजकल के युवा अपनी तथाकथित आधुनिक मानिकता के चलते ईश्वर की उपासना आदि कर्मो को कोरा पाखंड बताकर उससे दूर भागते है । और इसी नास्तिकता के चलते कई अपराध कर बैठते है ।

नास्तिकता के नुकसान –

१. जो व्यक्ति ईश्वर मे नही मानता उसमे भी दो प्रकार के व्यक्ति होते है, पहला वो जो ईश्वर मे भले ही न माने पर कर्म फल व्यवस्था मे पूरी आस्था रखता इसलिये पाप कर्मो से , बुरे कामो से स्वयं को दूर रखता है । तो हम ऎसै व्यक्ति को कही न कही आस्तिक कह सकते है । हम कह सकते है कि वो वैसे ईश्वर को नही मानता जिसे दुनिया ईश्वर कहती है ।

ऎसे व्यक्ति किसी को हानि नही पहुंचाते ,पर जब कभी जीवन मे कठिन समय देखना पङ जाये तो खुद से हार जाते है, अपनी नाकामी के लिये खुद को दोषी मानते है , और कई बार आत्महत्या जैसा पाप कर बैठते है ।

२. इसमे उस प्रकार के व्यक्ति आते है, जिन्हे ईश्वर का कोई भय नही होता , न ही कर्म फल मे कोई आस्था ।और अपनी इसी मानसिकता के चलते चोरी , हत्या , बलात्कार जैसे पाप करने से नही चूकते । फलस्वरूप अपना जीवन तो बर्बाद करते ही है, साथ ही जिनके घर मे चोरी या बलात्कार जैसा कुकर्म करते है , उनका जीवन भी बर्बाद कर डालते है ।

उपरोक्त दोनो उदाहरणो से सुस्पष्ट है , कि केवल कर्म फल मे आस्था रखने से हम अवसाद मे पङ सकते है , और कर्म फल मे आस्था न रखने से ईश्वर का भय न होने से भी हम विभिन्न प्रकारो के पापो मे लिप्त हो सकते है ।

३. अब तक दो प्रकार की नास्तिकता का वर्णन कर चुका हूँ , अब आते है सबसे खतरनाक और इस समय व्यापक रुप से फैली हुई नास्तिकता जो दिखने मे एकदम आस्तिकता लगती है पर मीठे विष के समान हमारा धीरे धीरे नाश कर रही है | बिलकुल सही समझे मै बात कर रहा हूँ , अंधविश्वास की ।
इस प्रकार की नास्तिकता मे कर्म से अधिक ईश्वर को महत्व देने लगता है या यूं कहे कि कर्म को तो छोङ ही देता है और उसके बजाय पीर पैगम्बर , गंडे तावीज , मन्नत , टोना टोटका, झाङ-फ़ूक इत्यादि । ये और इनसे मिलती जुलती सारी चीजे इसमे आ जाती है , मे विश्वास करने लगता है । और जब कर्महीनता की वजह से उचित परिणाम नही मिलता तो अपनी क्षमताओ के ऊपर ही सन्देह कर अपना आत्मविश्वास खो बैठता है ।

आस्तिकता – अब मै सही आस्तिकता क्या है , बताता हूँ ।
१. हमे ईश्वर की सत्ता मे आस्था रखते हुये अपना कर्म करना चाहिये । यह विश्वास रखना चाहिये कि मै परिश्रम करुँगा और ईश्वर मुझे उसका सही फल देगा । और उसके लिये मुझे किसी गंडे तावीज की जरूरत नही है ।

२. अगर मुझे सही फल नही भी मिला तो मै इसमे अपनी ही मेहनत की कमी और अपने किये बुरे कर्मो का फल मानकर स्वीकार करुंगा । और ईश्वर पर विश्वास रखते हुये आगे और मेहनत करूंगा ।

३. मै विश्वास करूंगा कि ईश्वर हर अच्छे बुरे कर्म का फल उसी प्रकार देता है । इसलिये किसी के भी साथ गलत नही करूंगा ।

तो आप समझ गये होंगे कि हमे किस प्रकार नास्तिकता को खत्म करके आस्तिक होकर कर्म करना है ।

News Reporter
My name is upendra.

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